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What is Ayurved : जानें आयुर्वेद का महत्त्व और इतिहास

Ayurved आखिर क्यों है हमारे सरीर के लिए इतना महत्त्व जाने पूरी जानकारी...

What is Ayurved Hindi

Ayurved kya hai
आयुर्वेद क्या है

सबसे पहले आयुर्वेद को जानने से पहले हमको यह जानना जरूरी है कि, आयुर्वेद का शाब्दिक अर्थ क्या होता है।

आयुर्वेद को हम दो भाग में बांटते हैं। पहला ‘आयु’ और दूसरा ‘वेद’

  • आयु का अर्थ होता है - उम्र या बोला जाये तो जीवन ( Life ) और
  • वेद का अर्थ होता है - ज्ञान ( Knowledge )


तो हम यह कह सकते है कि जो जीवन जीने का ज्ञान को सिखाता है उसका नाम है आयुर्वेद ( Science of Life ) or ( Knowledge of Life )



आयुर्वेद हमारे जीवन में बहुत बड़ा भूमिका निभाती है जो कि हमारे इतिहास में ऋषि मुनियों द्वारा हमें अनमोल उपहार मिला है। आयुर्वेद को हमारे जीवन में हजारो वर्ष पहले से ही इस्तेमाल में लिया जाता है और पुरे इतिहास से ले कर आज तक यह सर्वश्रेष्ट ही माना जाता है। इस धरती से उपजने वाले जितने भी पेड़ पोधे हैं वह सब आयुर्वेद कहलाते है।


याद रहे कि आयुर्वेद और जड़ीबूटी में अंतर होता है। लकिन जड़ीबूटी भी आयुर्वेद के अंतर गत आता है।


आयुर्वेद का इतिहास 


आयुर्वेद का इस दुनिया में बहुत बड़ा इतिहास है। यह भारत में पारंपरिक तोर से और पुरे दुनिया भर में स्वस्थ सेवा का सबसे पुरानी प्रणाली है। आयुर्वेद को हजारो लाखों साल पहले ही संस्कृत के वेद नामक पवित्र ग्रथों में लिखा गया था। अगर इतिहास में मुड़ कर देखा जाये तो ऋषि मुनियों के द्वारा बहुत पहले ही अन्य विषय के साथ आयुर्वेद की शिछा प्रणाली को भी विद्यार्थी में लागु कि गति थी।


अगर और गहराई में जाये तो विभिन्न विद्ववानो द्वारा आयुर्वेद की रचना काल 5000 से ले कर लाखों वर्ष पूर्व तक का माना है। अगर वेद पूरण को देखा जाये तो बताया गया है कि ब्रम्हा जी ने दक्ष प्रजापति को आयुर्वेद का ज्ञान दिए थे जो कि दक्ष प्रजापति का जन्म 18575 साल पूर्व हुवा  थे।


हिन्दू दर्म में धन्वन्तरि को आयुर्वेद के देवता माना गया है जो की भगवान विष्णु के अवतार है।


आयुर्वेद का मानव सरीर में कार्य करने का तरीका व नियम 


सबसे पहले हमें जानना होगा कि मानव सरीर और आयुर्वेद का आपस में क्या सम्बन्ध है। हमारा मानव सरीर 5 तत्वों से बना हुआ है। वह पांच तत्व है -

  • पृथ्वी 
  • जल 
  • अग्नि 
  • वायु और 
  • आकाश 


और देखा जाये तो आयुर्वेद भी इन्ही पांच तत्वों से पैदा होता है। तो हम कह सकते है कि आयुर्वेद का सीधा सम्बन्ध हमारे मानव सरीर से है। यह एक प्रकार का हमारे सरीर का मुख्या भोजन है जिस प्रकार मानव सरीर को जीने के लिए हवा और पानी कि आवश्यकता है उतनी ही आवश्यकता भोजन रूपी आयुर्वेद कि भी है। आयुर्वेद का हमारे सरीर में कार्य करने का तरीका बड़ा ही अनोखा है यह मानव सरीर को निरोग रखने, रोग हो जाने पर रोग से मुक्त करने अथवा उसका शमन करने यहाँ तक की सरीर का आयु में वृद्धि करने में भी कारगर है।


हमारे मानव सरीर में यह तिन दोष पाए जाते है -

  • वात : वायु और आकाश तत्व होते हैं।
  • पित्त : अग्नि तत्व होते हैं और।
  • कफ : पृत्वी और जल तत्व होते हैं।


चरक संहिता में लिखा गया है कि रोग और आरोग्य का कारण यह तिन दोष ही है। हमारे सरीर में इन तीनों दोषों का सम मात्रा में होना ही आरोग्य तथा विषमता होना रोग कहलाता है। आयुर्वेद हमारे सरीर में इन तीनों दोषों को सम मात्रा में रखने का ही कार्य करता है।


आयुर्वेद का हमारे सरीर में मुख्य रूप से दूषित पदार्थो को निकालने तथा रोगों से लड़ने का कार्य करता है जो कि यह दूषित तत्व भोजन, पानी और वायु के माद्यम से हमारे हमारे सरीर में प्रवेश करते है। और साथ ही सरीर के रोग प्रतिरोधक छमता को बढ़ने में भी अति कारगर है।


निष्कर्ष 


आयुर्वेद हमारे जीवन में लाखों वर्षों से चला आ रहा हैं। लकिन आज के दिनांक में हम आयुर्वेद से ज्यादा भरोसा केमिकल दवाइयों पे करते हैं जो कि बिलकुल गलत है क्योकि आयुर्वेद हमारे सरीर के लिए एक महत्वपूर्ण भोजन स्वरुप हैं। आपातकालीन स्तिथि में हम एलोपेथिक या केमिकल दवाइयों का इस्तेमाल कर सकते है। लेकिन अपने सरीर को दवाइयां खाने का आदि नही बनाना चाहिए। जब तक हम अपने जीवन में आयुर्वेद का उपयोग तथा सही सेवन करेंगे तो हमें कभी भी केमिकल दवाइयां खाने का जरुरत ही नही पड़ेगा और यह मानव सरीर ता उम्र ता जीवन एक स्वस्थ जीवन साबित होगा।

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